(इस कहानी के माध्यम से बच्चों को विलोम शब्द सिखाये जा सकते हैं)
अलटू-पलटू दोनों भाई हैं।
पर हैं एक-दूसरे के उल्टे।
अलटू कहता है-‘हाँ’।
पलटू कहता है-‘नहीं’।
अलटू कहता है-‘दिन’।
पलटू कहता है-‘रात’।
अलटू कहता है-‘छोटा’।
पलटू कहता है-‘बड़ा’।
अलटू जाता है दाएँ।
पलटू जाता है बाएँ।
अलटू चढ़ता है ऊपर।
पलटू उतरता है नीचे।
अलटू आता है अंदर।
पलटू जाता है बाहर।
एक दिन उनकी गाय खूँटा तोड़कर भागी।
अलटू ने कहा-‘पकड़ो!’ पलटू ने कहा-‘रुको’।
तब तक गाय भाग गई। गाय ने लोगों के खेत उजाड़ दिए। किसान शिकायत लेकर आए। उन्होंने पिता जी से कहा-‘तुम अलटू-पलटू को समझाते क्यों नहीं?’
पिता जी बोले-‘‘हमारे अलटू-पलटू तो बहुत काम के हैं। अलटू फसल बो आता है। पलटू काट लाता है।’’
अम्मा बोलीं-‘‘अलटू सूखने के लिए अनाज बिखेरता है। पलटू समेट लाता है।’’
दादी बोलीं-‘‘अलटू जब जागे, पलटू तब सोवे। दोनों से मिलकर घर की पहरेदारी होवे।”
यह सुनकर सब हँसते हुए चले गए।
प्रोफेसर साहब, आपकी यह रचना बच्चों को विलोम शब्द सिखाने का एक अत्यंत सहज, मनोरंजक और प्रभावी तरीका है। 'अलटू-पलटू' के माध्यम से जिस सादगी और लयबद्धता के साथ विपरीत शब्दों का बोध कराया गया है, वह बच्चों के मन में पढ़ाई के प्रति रुचि जगाता है। बाल-साहित्य में ऐसे ही रचनात्मक और प्रेरणादायक प्रयासों की आवश्यकता है। इस प्यारी कविता के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!
ReplyDelete