Thursday, 27 August 2026

दिल्लू का दलिया

 


दादी को दम-आलू अच्छा लगता है।

पापा को शाही पनीर बहुत पसंद है।

मम्मा के लिए राजमा-चावल के आगे सब बेकार।

पर दिल्लू को क्या पसंद है...?

कुछ नहीं।

दाल में मजा नहीं आता। गोभी अजीब लगती है। बैगन बेकार है। लौकी-कद्दू का तो कोई नाम भी न ले। पालक, परवल, भिंडी कुछ भी अच्छा नहीं लगता।



आज मम्मा को बुखार आ रहा है। सुबह से बिस्तर पर पड़ी हुई हैं। कामवाली बुआ गाँव गई हैं। उनकी बेटी की शादी है। पापा ड्यूटी गए हैं। घर पर अकेली दादी हैं।

तो फिर खाना कौन बनाएगा?

दिल्लू बेफिक्र है। दादी का व्रत है। इसलिए वह सिर्फ फल खाएँगी। फ्रिज में ढेर सारे फल पहले से रखे हैं। अपने लिए वह पिज्जा आर्डर कर लेगा।

लेकिन मम्मा...? वह क्या खाएँगी? डॉक्टर ने कहा है सिर्फ हल्का-फुल्का खाना दे सकते हैं--जैसे दलिया।



हाँ, यही ठीक रहेगा। मम्मा के लिए दलिया बना दूँगा। अपने लिए डबल चीज पिज्जा आर्डर कर देता हूँ।दिल्लू ने सोचा।

लेकिन दलिया बनाना तो उसे आता नहीं।

कोई बात नहीं दादी से पूछ लूँगा।सोचता हुआ दिल्लू किचन में जा पहुँचा।

‘‘सबसे पहले क्या करना होगा..?’’ उसने दादी से पूछा।

दादी मुश्किल से चलती हुई आईं। दिल्लू उनके बैठने के लिए कुर्सी ले आया।

‘‘सबसे पहले एक साफ पैन लेना होगा।’’ दादी बैठती हुई बोलीं।

‘‘फिर चूल्हा जलाना होगा...उफ, दादी ये सब तो मालूम है। उसके आगे बताइए।’’ दिल्लू चिढ़कर बोला।

‘‘तो फिर एक कटोरी दलिया लो और पैन में हल्की आँच पर भून लो।’’ उसके खीझने पर दादी हँसने लगीं।

दिल्लू दलिया भूनने लगा। बीच-बीच में पूछता--‘अब बस करूँ?’

दादी कहतीं--‘थोड़ा और, जब खुशबू आने लगे।

‘‘अब आगे क्या करना है?’’ दलिया भूनने के बाद दिल्लू ने पूछा।

‘‘अब देसी घी की छौंक लगानी है।’’

‘‘लेकिन घी कहाँ रखा है?’’ दिल्लू ने पूछा।


‘‘ये तो मुझे भी नहीं पता,’’ दादी बोलीं, ‘‘मम्मा से क्यों नहीं पूछ लेते?’’

‘‘......उन्हें सरप्राइज देना है।’’ दिल्लू ने होठों पर अँगुली रखकर कहा।

कई मर्तबानों के ढक्कन खोलने के बाद घी मिला। लौंग-इलायची ढूँढना इससे भी मुश्किल काम था। पर उसने ढूँढ निकाला। अब जरूरत थी दूध और शकर की। यह ढूँढना थोड़ा आसान था। दिल्लू दलिया बनाने में कसर नहीं छोड़ना चाहता था। ताकि मम्मा को भी पता लगे वह कितना अच्छा कुक है।

अखिरकार दलिया बनकर तैयार हो गया। लेकिन इतने से काम में दिल्लू के पसीने छूट गए। हाथ जलते-जलते बचा और कपड़े भी गंदे हुए। पर वह खुश था।

‘‘थोड़ा ठंडा हो जाने दो, फिर परोस देना।’’ दादी उसकी पीठ थपथपाती हुई कमरे में चली गईं।

मम्मा अभी सो रही थीं। दिल्लू ने सोचा क्यों न दलिया चखकर देखा जाए। पहली बार खुद से कोई चीज बनाई है। पता नहीं कैसा स्वाद हो। मम्मा को अच्छी लगे न लगे।



उसने कटोरे में दलिया निकाला। डरते-डरते एक चम्मच मुँह में रखा। स्वाद पाते ही उसका चेहरा खिल उठा। दलिया तो बहुत अच्छा बना था।

वाह क्या स्वाद है!

एक चम्मच...दो चम्मच...तीन चम्मच...वह खाता ही रहा।



मम्मा के लिए दोबारा बना लूँगा।उसने सोचा।

दादी बाथरूम से लौट रही थीं। दिल्लू को देखकर बोलीं, ‘‘तुम तो कहते थे तुम्हें दलिया पसंद नहीं है।’’

‘‘पर आज से अच्छा लगने लगा है।’’ दिल्लू हँसकर बोला।

‘‘लेकिन तुमने पिज्जा ऑर्डर किया था। उसका क्या होगा?’’

‘‘वह ऑर्डर तो मैंने कैंसिल कर दिया।’’

दिल्लू ने कहा और पैन में बचा दलिया कटोरे में उड़ेल लिया।

 



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बहुत बहुत शुक्रिया